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शुक्रवार, 26 मार्च 2010

bulandiyaan

तुमको गर चाहिए बुलंदी तो, सायबां को तलाश मत करना/जिस सितारे को ढूंढते हैं लोग, उस सितारे की तरह तुम बनना/इन  खलाओं में और सूरज हैं,और सूरज में भी समंदर हैं/तुम परिंदे हो आसमां में उड़ो, बादलों पर यकीन मत करना/धूप जिस्म को जलाती है, रूह को जिलाती है/धूप इक सियासत है, इससे बेहतर है फासले रखना.